अकाल मृत्यु या अप्राकृतिक मृत्यु (जैसे दुर्घटना, जहर, आत्महत्या, सर्पदंश, या बीमारी से अचानक मौत) होने पर आत्मा प्रेत योनि में फंस जाती है। ऐसी आत्माओं की शांति के लिए गया जी में नारायण बलि (Narayan Bali) पूजा की जाती है।
नारायण बलि पूजा की शास्त्रीय विधि
यह दो दिवसीय विशेष अनुष्ठान है। पहले दिन मृत देह का प्रतीक बनाकर उसका संस्कार किया जाता है और दूसरे दिन भगवान नारायण (विष्णु) के रूप की पूजा करके प्रेत बाधा से मुक्ति दिलाई जाती है।
नियम: इस पूजा में यजमान को नए वस्त्र (धोती-गमछा) पहनने होते हैं और पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है।