गया जी के तीन मुख्य धामों में फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर और अक्षयवट शामिल हैं। इन तीनों स्थलों पर अलग-अलग विधियों से पूजा की जाती है।
फल्गु नदी में तर्पण और बालू का पिंड
फल्गु नदी को 'अंतःसलिला' कहा जाता है क्योंकि यह ऊपर से सूखी दिखती है पर इसके नीचे जल बहता रहता है। माता सीता के शाप के कारण यह नदी सूखी रहती है। यहां पर रेत (बालू) खोदकर जल निकाला जाता है और उसी से तर्पण और बालू के पिंड बनाए जाते हैं।
अक्षयवट (Akshayvat) - शाश्वत शांति
अक्षयवट एक अमर बरगद का पेड़ है। माता सीता ने इसे दीर्घायु और अमरता का वरदान दिया था। पिंडदान की अंतिम प्रक्रिया यहीं पूरी होती है। माना जाता है कि अक्षयवट के नीचे किए गए पिंडदान से पूर्वज हमेशा के लिए तृप्त हो जाते हैं (अक्षय तृप्ति)।